मेरी शादी को तब एक ही साल हुआ था और ज़िंदगी में मज़ा आ रहा था। बीवी मस्त थी और चुदाई भरपूर चल रही थी। मेरी वाइफ प्रेरणा की उम्र 24 और मेरी उम्र 27 थी तब। वो सॉलिड माल है। 5.6 हाइट, 36-26-36 का फिगर और दूध जैसा रंग। स्किन ऐसी कि ज़ोर से पकड़ लो तो लाल हो जाती है। उसकी पिंक चूत एकदम टाइट थी। उसकी कहानी बाद में सुनाऊँगा, पहले मेरे सपनों की नई रानी बीता की sex kahani in hindi।
बीता मेरी वाइफ की छोटी बहन है और उस टाइम 21 साल की थी। बस वो प्रेरणा जैसी ही थी। उतनी ही हाइट, वैसा ही दूध जैसा रंग, उतने ही मोटे बूब्स और उतनी ही मोटी गाँड थी, लेकिन प्रेरणा से 3 साल छोटी थी। देखने में एकदम श्रद्धा कपूर लेकिन बड़ी गाँड वाली। उसे पीछे से देख के लंड पागल हो गया था। हमारी शादी के दिन उसने साड़ी पहनी थी जिसमें से उसकी कमर दिख रही थी।
फुल स्लीव वाला डिज़ाइनर ब्लाउज जिसके स्लीव्स में कट बने हुए थे जिसमें से उसकी गोरी चिकनी बाँहें झाँक रही थीं। साड़ी भी उसकी परफेक्ट शेप वाली गाँड को छिपा नहीं पा रही थी। ऐसा लगा था कि किसी ने गाँड पूरे दिल से बनाई है। उसके सेक्सी बदन से प्यार हो गया था पहले दिन से ही। किसी और की शादी होती तो उसे बैंकवेट हॉल की छत पे ले जा के चोदने के लिए ज़रूर पटाता लेकिन अपनी ही शादी थी और उसकी बहन कल चोदने को मिल ही रही थी। ऐसा नहीं है कि अपनी वाइफ को धोखा देने का कोई मन था या मैं उससे प्यार नहीं करता था। बस बीता थी ही ऐसा माल कि उसे चाखे बिना रहा नहीं जा रहा था।
उससे फोन और चैट पे बातें होने लगी थीं हर दिन पर बातों से दिल नहीं भरता था। वीडियो कॉल पे उसके पिंक लिप्स देख के कई बार लंड पे हाथ चला जाता था और उसे पता भी नहीं चलता था। उससे वीडियो कॉल करते-करते मुठ मारता था और जब निकलने वाला होता था तो बहाने से कॉल काट देता था। माल ऐसे निकलता था जैसे उसके होठों पे ही निकल रहा हो। उसकी चूत के लिए तड़प बढ़ती जा रही थी और कोई चांस नहीं मिल रहा था। हँसी-मज़ाक तो होता था और बाहर भी कई बार जाते थे but वाइफ हमेशा साथ होती थी और वाइफ भी इतनी हॉट थी कि लंड सैटिस्फाय रहता था but दिल में बीता का ही चेहरा था। अब हम काफी करीब आ चुके थे लेकिन पता नहीं चल रहा था कि ये करीबी नॉर्मल थी या वो भी मेरी तरफ बढ़ रही थी। हँसी-मज़ाक में वो भी मेरे गले लग जाती थी और मैं भी उसे गले लगा लेता था। आँख मारना और फ्लाइंग किस देना भी नॉर्मल हो गया था लेकिन अभी फाइनल कदम उठाना बाकी था।
एक दिन उनके घर जाना हुआ तो बीता कॉलेज गई थी घर पर बस उसकी मॉम थी। वो और वाइफ मार्केट जाने लगे तो मैंने थकान बोल के जाने को मना कर दिया और वो ऑटो से चले गए। अब मैं भगवान से विश मांग रहा था कि बीता अभी कॉलेज से आ जाए और उनके जाते ही घर की घंटी बजी। मैंने गेट खोला तो सामने मेरे सपनों की रानी खड़ी थी। ऑल ब्लैक सूट और सलवार में उसका गोरा बदन कमाल लग रहा था। उसने चश्मा लगाया था और बाल उसके माथे पर झूल रहे थे, मेरे लंड ने उसे देख के करवट ली। उसने मुझे नोटिस ही नहीं किया और अपने फोन में लगे-लगे अंदर आ गई, उसे लगा उसकी मॉम ने गेट खोला है।
“मम्मा पानी,” वो बैग रखते हुए बोली।
“अभी लाता हूँ बेटी,” मैंने कहा।
उसके हाथ से बैग गिर गया और वो घबरा के पलटी। मैं उसकी तरफ देख के स्माइल कर रहा था और वो अपनी बड़ी-बड़ी खूबसूरत काली आँखों से मुझे देखे जा रही थी।
“जीजूऊऊऊ आप!!”
वो भाग के मेरे गले लग गई, “आपने तो डरा ही दिया जीजू जान।”
वो मुझे प्यार से जीजू जान बोलती थी और मैं बस जान सुनता था। बस मुझे उसी दिन का इंतज़ार था जिस दिन मेरी जान मुझे जीजू जान नहीं बस जान या विरेन जान बोलेगी। अकेले घर में उसे गले लगा कर मेरा लंड मचल उठा। उसके चुचें मेरे सीने पे दबे हुए थे और उसकी खुशबू मुझे दीवाना कर रही थी। अभी तक हमारा रिश्ता मासूम था और उसकी मासूम जवानी पूरे प्यार से मुझसे लिपटी हुई थी। मैंने खुद को सँभाला और उसकी पीठ पे हल्के से हाथ फेरा।
“अंदर आते में देख भी लिया कर किसके घर में जा रही है, किसी दिन कोई उठा के ले जाएगा तुझे।”
“मुझे कौन ले जाएगा यहाँ से जीजू जान, मैं यहाँ ही किसी काम ही नहीं हूँ,” वो हँसते हुए बोली। उसे नहीं पता था वो क्या चीज़ है, वो अपनी जवानी के जादू से खुद ही अनजान थी।
“मुझे मौका मिला तो मैं ज़रूर ले जाऊँगा तुझे, मेरे बहुत काम की है तू पागल,” मैंने उसके कंधे पकड़ कर उसे अलग करते हुए कहा। दिल तो कर रहा था कि उसके होठों पर अभी अपने होठ रख दूँ और उसकी खुशबू में खो जाऊँ।
वो सरप्राइज़ हो के मुझे देखने लगी। शायद उसे हम दोनों के अकेले होने का एहसास हो गया था। वो इधर-उधर देखते हुए बोली, “सब कहाँ गए?”
“प्रेरणा और मॉम मार्केट गए हैं और मुझे भी ले जा रहे थे पर मैं नहीं गया,” मैंने उसे आँख मारी।
“अच्छा किया आपने वरना मैं बोर हो जाती,” वो हँसते हुए बोली।
“कुछ खाएगी? ऑर्डर कर लेते हैं कुछ,” मैंने अपना फोन उठाया।
“नहीं जीजू जान, भूख नहीं है,” वो सोफा पर पसरते हुए बोली।
“क्यों बॉयफ्रेंड ने क्या खिलाया?” मैंने उसके बगल में बैठ के पूछा।
“आपको कैसे पता क्या पता मेरी गर्लफ्रेंड हो,” वो आँख मार के बोली।
“ये तो किसी लड़के का नुकसान है,” मैं भी अब मज़ाक के मूड में आ चुका था।
“आप ना जीजू जान कम नहीं हो कुछ, टेढ़ी-मेढ़ी बातें इतने सीधे बन के बोल देते हो,” उसने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए मेरे हाथ पे मुक्का मारा।
“अरे सच ही तो बोला मैं, अब अगर तू भी जीएफ बनाएगी तो एक लड़का तो मारा गया ना जिसके हिस्से तेरे जैसी प्यारी लड़की आती,” मैंने उसे साइड से गले लगा कर कहा।
उसने मुझे तिरछी नज़र से देखा, “इतनी प्यारी हूँ मैं?”
“तुझे नहीं पता कितनी प्यारी है तू,” मैंने उसकी आँखों में देखते हुए कहा। मेरी आँखों में हवस नहीं थी बस उसकी खूबसूरती के लिए तारीफ थी। उसकी गहरी काली आँखें मुझे उसकी तरफ खींच रही थीं। थोड़ी देर तक वो मेरी आँखों में देखती रही फिर उठ कर अपने रूम में जाने लगी। जैसे ही वो जाने के लिए पलटी मेरा हाथ मेरे लंड पे चला गया एडजस्ट करने के लिए। लेकिन तभी उसकी आवाज़ सुन कर मैंने हाथ लंड पर से हटा लिया।
उसने जाते-जाते कहा, “फ्रेश हो के आपके पास आती हूँ जीजू जान।”
मेरी आँखें खुली रह गईं। उसे भी शायद अपने शब्दों की गलती का एहसास हो गया था, वो रुकी, पलटी लेकिन फिर वापस मुड़ के अंदर चली गई। उसने कुछ गलत नहीं कहा था पर उसके दिल के चोर ने उसकी बात को डबल मीनिंग बना दिया था। मुझे पता चल गया था कि जो मैं चाहता हूँ वो अब स्टार्ट हो चुका है। मैं दिल ही दिल में बहुत खुश था कि सेक्सुअल टेंशन बढ़ रही है। वो रूम में चेंज करने नहीं गई थी बल्कि टाइम लेने गई थी, उसके दिल में भी चोर था बस उसे डिसाइड करना था। मैंने अपने धड़कते दिल को काबू में किया और अपने खड़े 7 इंच के लंड को पैंट में एडजस्ट किया वरना वेट स्पॉट बनने ही वाला था।
वो मुझे ब्लैक ड्रेस में वैसे ही पागल कर के चली गई थी और अब उसका इंतज़ार भी लंबा लग रहा था मुझे। जब वो बाहर आई तो उसने ब्लैक टॉप और ब्लैक शॉर्ट पहना था। उसकी लंबी चिकनी गोरी टाँगें मुझे इनवाइट कर रही थीं। बस मन कर रहा था उसका शॉर्ट फाड़ के उसकी टाँगें खोल दूँ और उसकी चूत में खो जाऊँ।
वो मेरे बगल में आ कर बैठ गई। उसकी नज़रें झुकी हुई थीं और वो घबरा रही थी। बहुत कोशिश के बाद वो बोली, “सॉरी जीजू जान अगर आपको अनकम्फर्टेबल लगा हो तो।”
“किस बात के लिए!” मैंने उसे कुरेदा।
“वो जैसे मैंने बोला जाते हुए जब मैं चेंज करने जा रही थी,” वो शरमा रही थी, यही तो मैं चाहता था।
“क्या बोला था तूने, याद दिला ज़रा,” मैं चाहता था कि वो और ज़्यादा अजीब हालत में फँस जाए ताकि उसे कुछ समझ में न आए और उसके मुँह से सब निकले अपने आप।
“यही कि चेंज करके आपके पास आती हूँ,” उसने बड़ी मेहनत से कहा और वो काँप सी गई। मेरे लंड ने करवट ली। उसकी घबराहट मेरे दिल की धड़कन बढ़ा रही थी। मुझे उस पर तरस भी आ रहा था और अपना प्लान बनता देख कर खुशी भी हो रही थी।
“तो इसमें माफी जैसी क्या बात है यार? तू आ तो गई ना मेरे पास।” मैंने उसे कंधे पे हाथ फेरते हुए कहा। वो अभी नहीं आई थी अभी तो उसे पूरी तरह मेरे पास आना था। मेरी बाँहों में आना था और मेरे लिए अपनी लंबी टाँगें खोलनी थीं।
“कुछ नहीं जीजू, सॉरी। मैंने ऐसे ही बोला कहीं आपको बुरा न लगा हो,” वो अभी भी कंफ्यूज़ थी।
“अरे पर बुरा क्यों लगेगा तू तो आ गई ना मेरे पास चेंज करके,” मैंने उसे अपने से चिपका लिया।
वो आँखें बड़ी कर के मुझे देखने लगी।
मैंने पूछा, “क्या बात है बीता बता ना।”
“मुझे लगा आप ऐसा कुछ न समझें कि मैं आपके पास आना चाहती हूँ। मैंने तो नॉर्मली ही कहा था, वो मेरे मुँह से ऐसे निकल गया,” उसकी आवाज़ काँप रही थी।
अगर उसे मैं सपोर्ट न कर रहा होता तो शायद वो रो देती। बात इतनी बड़ी नहीं थी लेकिन उसके दिल के चोर उसे परेशान कर रहा था। मैं उसे देखे जा रहा था। और वो मेरे कंधे से लगी हुई थी। उसकी नज़रें झुकी थीं और वो अपने नाखून से अपनी टाँगों पर गड़ा रही थी। उसकी साँसें तेज़ थीं, मतलब वो नर्वस हो रही थी।
“बीता मेरी तरफ देख,” सही टाइम देख के मैंने उससे कहा।
उसने सिर उठा के मेरी तरफ देखा। वो तैयार थी बस शुरू मुझे करना था। वो मेरी तरफ ऐसे देख रही थी जैसे पूछ रही हो कि क्यों मैं उसे अपनी बाँहों में नहीं भर रहा हूँ।
“दिमाग में किसी सिंपल बात की अलग मीनिंग तब आती है जब वो बात दिल में होती है,” मैंने उसका गाल सहलाते हुए कहा।
मैं उसकी तरफ देख के स्माइल कर रहा था और उसने अपनी नज़रें नीचे कर लीं। उसे ऐसा लग रहा था कि वो पकड़ी गई है। 21 साल की बला की खूबसूरत माल अब मुझसे चुदने ही वाली थी। मैंने उसके हाथ पर हाथ रखकर दबाया तो वो और सिकुड़ गई। वो समझ नहीं पा रही थी कि उसे कैसे रिएक्ट करना है।
“क्या हुआ तुझे?” मैंने उससे पूछा।
वो कुछ नहीं बोली और वैसे ही बैठी रही। मैंने फिर से उसके कंधे पर हाथ रख दिया और उसके कंधे को सहलाने लगा। उसने अपना सिर मेरे कंधे से टिका दिया और आँखें बंद कर लीं। उसकी धड़कन बढ़ी हुई थी और उसकी साँसें भी तेज़ थीं। मैंने उसके सर पे किस किया और उसके कंधे और बैक पे हाथ फिराने लगा। उसका जिस्म गरम हो रहा था और उसकी धड़कन तेज़ हो रही थी।
“तुझे डर लग रहा है क्या बीता?” मैंने उसके बाल सहलाते हुए पूछा।
वो मेरे सीने में छुपी रही और कुछ नहीं बोली। मैंने उसका हाथ पकड़ के उसे अपने से लिपटा लिया तो उसने काँपते हुए हाथ मेरे कंधे पर रख दिए। मैंने बाल उसके फेस से हटाए और उसका चेहरा ऊपर उठाया। उसकी आँखें बंद थीं और उसका चेहरा लाल हो रहा था। मन कर रहा था कि बस अभी चूम लूँ इन हसीन होठों को। गुलाब जैसे होठ और सेब जैसे रसीले गाल थे उसके।
“तुझे मुझपे भरोसा है ना बीता,” मैंने उसके फेस के पास अपने लिप्स ले जा के पूछा। उसने हाँ में सर हिलाया।
“तो आँखें खोल ना बेबी,” मैंने प्यार से उसे बोला। मुझे पता था कि बेबी सुन के वो रिएक्ट ज़रूर करेगी।
“जीजू आप…,” उसने कुछ बोलना चाहा लेकिन मैंने उसकी बात बीच में ही काट दी और अपने तड़पते होठ उसके नरम रसीले होठों पर रख दिए। उसने आँखें बड़ी कर लीं और मेरी बाँहों में मचलने लगी। मैंने उसे ज़्यादा कस के नहीं पकड़ा था लेकिन वो अलग नहीं हो रही थी बस मचल रही थी। मेरी आँखें बंद थीं और मैं उसकी किस के नशे में खोया हुआ था। फिर उसका भी बदन ढीला पड़ गया और उसका हाथ मुझसे लिपट गया। हम अगल-बगल में बैठे हुए थे और वो मुझसे साइड से लिपटी हुई थी। मैंने उसे बाँहों में भर लिया और उठा के अपने ऊपर खींच लिया। उसने अपना फेस मुझसे अलग किया तो मैंने फिर उसे अपने पास खींच लिया और उसे किस करने लगा। अब वो घुटनों के बल मेरी गोद में बैठी थी। उसके दोनों पैर मेरी दोनों साइड में थे और मेरा लंड उसकी चूत को टच कर रहा था, उसके मुलायम चुचें मेरी चेस्ट पे रखे हुए थे। ज़रूर वो ब्रा नहीं पहन के आई थी क्योंकि उसके बूब्स मेरी चेस्ट पे बटर की तरह लग रहे थे।
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